Thursday, April 10, 2014

Dungarpur Bird Fair Firs Day Event & Photos

डूंगरपुर बर्ड फेयर की धूम शुरू 
गेपसागर झील पर ‘परिंदों के मेले’ में उमड़े नौनिहाल

डूंगरपुर, 21 दिसंबर/जिले की समृद्ध नैसर्गिक संपदा से देश-प्रदेश को रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से  जिला कलक्टर विक्रम सिंह की पहल पर वन विभाग, यूनिसेफ, पर्यटन विभाग तथा डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के संयुक्त तत्वावधान में शहर की शान गेपसागर झील पर शनिवार को विशाल बर्डफेयर का आयोजन किया गया। दो दिवसीय इस मेले  के पहले दिन देश-प्रदेश के ख्यातनाम बर्डवॉचर्स की मौजूदगी में नौनिहालों ने परिंदों की रंगीन दुनिया को निहारा। 
भोर से लगी कतार: 
आज अल सुबह से ही गेपसागर झील के पिछले हिस्से में बर्डवॉचिंग के लिए विद्यार्थियों की कतार लगनी प्रारंभ हो गई थी। बर्डवॉचिंग के तहत जिला मुख्यालय के 18 विद्यालयों के पांच सौ से अधिक विद्यार्थियों को भरतपुर और उदयपुर से आए बर्ड एक्सपर्ट्स द्वारा झील में जलक्रीड़ा करने वाले स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों को दिखाया गया। इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से बायनाकूलर्स और स्पोटिंग स्कॉप मंगवाएं गए थे जिनके माध्यम से विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को रंग-बिरंगे पक्षियों और उनकी जलक्रीड़ाओं को दिखाते हुए उनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों ने पक्षियों को जानने में बड़ी रूचि दर्शाई और एक्सपर्ट्स से भांति-भांति के सवाल पूछे। 
प्रदर्शनी में उमड़ा उत्साह:  
बर्ड वॉचिंग के मौके पर एक विशाल प्रदर्शनी भी आयोजित की गई । प्रदर्शनी में जिले में पाए जाने वाले विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के दो सौ से अधिक फोटोग्राफ्स सम्मिलित किए गए थे। आज पूरे दिन विद्यार्थियों के साथ ही आए हुए बर्डवॉचर्स ने भी फोटोग्राफ्स को देखा और इनकी सराहना की। इस प्रदर्शनी में जिला कलक्टर विक्रम सिंह और जनसंपर्क अधिकारी कमलेश शर्मा द्वारा खीचे गए पक्षियों के फोटोग्राफ्स को सम्मिलित किया गया था। इसके अलावा इस प्रदर्शनी में पक्षियों पर भारतीय डाक विभाग तथा विदेशों में प्रकाशित डाक टिकटों के फोटोग्राफ्स को सम्मिलित किया गया था। डाक टिकटों से संबंधित फोटोग्राफ्स शहर के प्रसिद्ध डाक टिकट संग्रहकर्त्ता लोकेश गांधी के संग्रह से प्रदर्शित किए गए थे। 
क्विज व ड्राईंग प्रतियोगिता हुई:   
पहले दिन बर्डवॉचिंग स्थल पर ही पक्षियों से संबंधित क्विज और पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। दोनों प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया और इस बर्डफेयर के प्रति अपने उत्साह का प्रदर्शन किया। सीईई अहमदाबाद के डॉ. संतोष गुप्ता के निर्देशन में क्विज व पेंटिंग प्रतियोगिता में विपीन पण्ड्या, धीरज टेलर, भीमसिंह, अभिलाषा भावसार, भीमसिंह अहाड़ा, पद्मेश गांधी आदि ने सहयोग दिया। 
सैकड़ों बच्चों ने बनवाएं परिंदों के टेटू:
बडफेयर के तहत जिला प्रशासन द्वारा बच्चों के आकर्षण को देखते हुए चेहरों पर पक्षियों के टेटू उकेरने के लिए फेस पेंटिंग एक्टिविटी भी करवाई गई। उदयपुर के प्रसिद्ध चित्रकार दर्शित भास्कर निर्मल यादव व सूरज सोनी आदि ने यहां पहुंचे सैकड़ों बच्चों के चेहरों पर टेटू बनाए। बच्चों के साथ ही कई आगंतुकों और अधिकारियों ने भी चेहरे पर टेटू लगवाया और इस उत्साह के सहभागी बने। 
आयरलेण्ड के पॉल भी पहुंचे: 
डूंगरपुर जिले में बर्डवॉचिंग के लिए अक्सर पहुंचने वाले आयरलेण्ड के बर्डवॉचर पॉल पेट्रिक कुलेन को भी ईमेल के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा निमंत्रण भेजा गया था और वे इस मौके के लिए विशेष रूप से पहुंचे। पॉल ने आज दिनभर बर्डफेयर की विभिन्न गतिविधियों में उत्साह से भाग लिया और गेपसागर की समृद्ध जैव विविधता की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शुक्रवार शाम से आज प्रातः तक गेपसागर में 94 प्रजातियों के पक्षियों को देखा है। 
बर्डवॉचिंग का मतलब शगुन:
आयरलेण्ड के बर्डवॉचर  पॉल ने बर्डफेयर के मुख्य संयोजक व जिला कलक्टर विक्रम सिंह से चर्चा करते हुए बताया कि बर्डवॉचिंग ऑस्पियस शब्द से बना हुआ है जिसका लेटिन अर्थ शगुन होता है। उन्होंने इस दृष्टि से बर्डवॉचिंग को प्रमोट करने की आवश्यकता जताई व जिला प्रशासन के इस प्रयास की सराहना की। 
देश-प्रदेश की बड़ी हस्तियां पहंुची: 
डूंगरपुर में शनिवार से प्रारंभ हुए बर्डफेयर में हिस्सा लेने के लिए बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. असद रहमानी, सीसीएफ डॉ. एनसी जैन, पी.सोमशेखर, रघुवीरसिंह शेखावत, बांसवाड़ा राजघराने के जगमालसिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. अभिषेक भटनागर, मुम्बई से नेचरट्रेल के हरि दिवेकर, सीईई अहमदाबाद के डॉ. संतोष गुप्ता, पक्षी विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा और डॉ. एसपी मेहरा सहित मुम्बई, अहमदाबाद, दिल्ली, इंदौर, कोटा, भरतपुर, उदयपुर और प्रदेश के कई जिलों से ख्यातनाम बर्डवॉचर्स और पर्यावरणचिंतक डूंगरपुर पहुंचे और दिनभर बर्डवॉचिंग की गतिविधियों में हिस्सा लिया।  
डॉ. रहमानी ने भी देखी प्रदर्शनी: 
बर्डफेयर के तहत शनिवार को पहुंचे डॉ. असद रहमानी ने भी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और इसमें प्रदर्शित विषयवस्तु की सराहना की। उन्होंने डूंगरपुर जैसे क्षेत्र में उच्च क्वालिटी की फोटोग्राफ्स को देखकर आश्चर्य भी जताया।  
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कांफ्रेंस में हुई परिंदों व पर्यावरण पर चर्चा
  प्रकृति के सौगात को संरक्षित करें: डॉ. रहमान 
फोटो संलग्न
डूंगरपुर, 21 दिसंबर/ बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. असद रहमानी ने कहा है कि हमें 1300 प्रजातियों के पक्षियों की सौगात मिली है और इसे संरक्षित करने के लिए प्रयासा किए जाने चाहिए।  
डॉ. रहमानी शनिवार को जिला परिषद के ईडीपी सभागार में बर्डफेयर के मौके पर आयोजित हुई कांफ्रेस में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। 
उन्होंने कहा कि पक्षियों की समृद्ध प्रजातियों के बावजूद भारत तीसरा देश है जहां पर सबसे ज्यादा खतरे के निकट प्रजातियों के पक्षी भी हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में 42 प्रजातियां खतरे के निकट है। उन्होंने कहा कि देश में 464 क्षेत्र व राजस्थान में 24 क्षेत्रों का चयन किया गया है जिनमें संरक्षण की दृष्टि से कार्य करने की आवश्यकता है। 
डॉ. रहमानी ने कहा कि हमें टाईगर के अलावा पक्षियों के बारे में भी सोचना चाहिए। उन्होंने इको सिस्टम की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि उपेक्षित इको सिस्टम और उपेक्षित संरक्षण क्षेत्रों के बारे में भी प्रभावी कार्यवाही करने की आवश्यकता है। उन्होंने संरक्षण की दृष्टि से किए गए शोधों को अच्छा बताया और संरक्षण कार्यों को बेहतर तरीके से संपादित करने की आवश्यकता जताई। 
 इस कांफ्रेंस में देश-प्रदेश से आने वाले पक्षी विशेषज्ञ और पर्यावरण चिंतकों द्वारा जिले की नैसर्गिक विरासत और परिंदों की स्थितियों तथा इससे पर्यटन विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। 
कार्यशाला में  सीसीएफ डॉ. एनसी जैन, पी.सोमशेखर ने वन्यजीव संपदा के साथ पक्षियों के संरक्षण की दृष्टि से किए जाने वाले प्रयासों के बारे में बताया। पर्यावरण प्रेमी व बांसवाड़ा राजघराने के जगमालसिंह ने वागड़ अंचल की जैव विविधता को इसी प्रकार की समृद्ध बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाने की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने उद्योगों के वेस्ट को रिसाईकिल कराने की बात कही। इस मौके पर पर्यावरण चिंतक आलोक गुप्ता ने बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता जताई और वरिष्ठजनों से आह्वान किया कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सोशल मीडिया के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों के प्रति अभ्यस्त हो। इंटेक सदस्य हर्षवर्धनसिंह ने झीलों में कमलदल की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट किया और इस प्रकार के बर्डफेयर का सतत आयोजन करने की बात कही तो मुम्बई से आए हरि दिवेकर ने मुम्बई से साबला तक की यात्रा में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों पर प्रकाश डाला। इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसरा, उप वन संरक्षक श्रीमती राज संदीप, कोषाधिकारी ब्रहमप्रकाश शर्मा, डॉ. दिपक द्विवेदी,  सहित कई संभागियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। 
बोखा और ट्री फ्रोग ने जगाया आकर्षण: 
कांफ्रेंस दौरान वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सतीश शर्मा ने डूंगरपुर की वन्यजीव संरक्षण की ऐतिहासिक परंपरा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यहां के पूर्व महारावल लक्ष्मणसिंह ने अपने प्रिय बोखा बाघ की मौत के बाद नवलखा क्षेत्र में इसकी समाधि बनवाई। उन्होंने बताया कि डूंगरपुर राज्य में ही पहली बार 1933 में ‘कानून हिफाज़त जंगली जानवरान राज्य डूंगरपुर’ भी अस्तित्व में आया। डॉ. शर्मा ने यह भी बताया कि डूंगरपुर-बांसवाड़ा व प्रतापगढ़ जिलों में पेड़ पर पाए जाने वाले और पेड़ पर ही अण्डे देने वाले अनोखे ट्री फ्रोग की प्रजाति पाई जाती है तो संभागी बड़े आकर्षित किए। 
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 डॉ. रहमानी ने किया अभिलाषा की पेंटिंग का विमोचन
  डूंगरपुर, 21 दिसंबर/ ‘डूंगरपुर बर्डफेयर के तहत शहर की वरिष्ठ चित्रकार अभिलाषा भावसार द्वारा तैयार की गई खास पेंटिंग का विमोचन शनिवार को बोम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. असद रहमानी ने किया। जिला परिषद ईडीपी सभागार में इस पेंटिंग का विमोचन करते हुए डॉ. रहमानी ने अभिलाषा को बधाई दी।  श्रीमती भावसार द्वारा अपनी पेटिंग की विषयवस्तु भी इस बर्डफेयर के आयोजन स्थल व शहर की शान गेपसागर और जिले में बहुतायत से पाया जाने वाले पक्षी सारसक्रेन को बनाया गया है। पूर्णतया इस बर्डफेयर को समर्पित इस पेंटिंग में बादल महल व गेपसागर के साथ उड़ान भरते सारस क्रेन की पेंटिंग को देखकर मौजूद सैकड़ों संभागियों ने करतल ध्वनि से सराहना की। 
 




























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